'सूफियम सुजातयम' का डिजिटल प्रीमियर 3 को, बदलते रिश्तों का किस्सा

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-दिनेश ठाकुर

प्रेमी-प्रेमिका के बदलते रिश्तों पर कई फिल्में बन चुकी हैं। एक फिल्म का नाम ही 'बदलते रिश्ते' (1978) है, जिसमें जीतेंद्र, ऋषि कपूर और रीना रॉय के अहम किरदार थे। इससे पहले आई 'घरौंदा' (1977) ज्यादा सलीकेदार फिल्म थी। इसके मध्यम वर्गीय नायक (अमोल पालेकर) की प्रेमिका (जरीना वहाब) एक विधुर उद्योगपति (डॉ. श्रीराम लागू) से शादी कर लेती है। प्रेमी-प्रेमिका को लगता है कि दिल का मरीज उद्योगपति चंद दिनों का मेहमान है। उसके बाद उसकी सारी दौलत उनकी हो जाएगी। लेकिन शादी के बाद नायिका धीरे-धीरे जिम्मेदार पत्नी के किरदार में ढलने लगती है और नायक से उसका प्रेम बहुत पीछे छूट जाता है। इसी से मिलती-जुलती कहानी पर 1981 में के. भाग्यराज की तमिल फिल्म 'अंथा एझु नाटकल' (सात दिन का नाटक) आई, जिसे हिन्दी में 'वो सात दिन' (1983) नाम से बनाया गया। अनिल कपूर की यह पहली कामयाब फिल्म थी। इसमें उनकी प्रेमिका (पद्मिनी कोल्हापुरे) की शादी एक डॉक्टर (नसीरुद्दीन शाह) से कर दी जाती है। यहां भी शादी के बाद नायिका आदर्शवादी पत्नी में तब्दील हो जाती है।

अब मलयालम फिल्म 'सूफियम सुजातयम' (सूफी और सुजाता) में बदलते रिश्तों का किस्सा कुछ हटकर सुनाया जाएगा। इसमें ऊंची जाति की सुजाता (आदित्य राव हैदरी) की कहानी है। वह सूफी (जयसूर्या) से प्रेम करती है, लेकिन इसे 'लव जिहाद' ठहराते हुए समाज दोनों का दुश्मन बन जाता है। सुजाता की शादी किसी और से कर दी जाती है। शादी के बाद भी वह सूफी को भुला नहीं पाती। आदित्य राव हैदरी ने अपना फिल्मी सफर 2006 में मलयालम की 'प्रजापति' से शुरू किया था। तमिल की 'श्रृंगारम' (2007) में देवदासी का किरदार अदा कर वे सुर्खियों में आईं। बॉलीवुड की 'ये साली जिंदगी', 'रॉकस्टार', 'मर्डर 3' और 'पद्मावत' के बाद वे फिर मलयालम फिल्मों की तरफ मुड़ी हैं। निर्देशक नाराणीपुझा शनवास की 'सूफियम सुजातयम' का 3 जुलाई को डिजिटल प्रीमियर किया जाएगा। सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आने वाली यह पहली मलयालम फिल्म होगी।

'सूफियम सुजातयम' अपेक्षाकृत छोटे बजट की फिल्म है। बड़े बजट वाली कुछ मलयालम फिल्मों के लिए सिनेमाघर खुलने का इंतजार किया जा रहा है। बॉलीवुड की तरह दक्षिण में भी सिनेमाघर मालिकों ने फिल्मों के सीधे डिजिटल प्रीमियर के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, लेकिन अगर सिनेमाघर जुलाई तक नहीं खुलते हैं तो बड़ी फिल्मों को भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उतारा जा सकता है।



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