चंद्रग्रहण जुलाई 2020 का असर: इस माह इन दो ग्रहों का परिवर्तन भी रहेगा भारी

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इस साल यानि 2020 का तीसरा चंद्र ग्रहण 5 जुलाई, रविवार को लगेगा। यह ग्रहण एक उपछाया चंद्र ग्रहण होगा यानी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उपछाया चंद्र ग्रहण ( उपच्छाया चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया वाले क्षेत्र में चंद्रमा आ जाता है और चंद्रमा पर पड़ने वाला सूर्य का प्रकाश कटा हुआ प्रतीत होता है। ) का असर न के बराबर होता है, लेकिन फिर भी सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।

यह ग्रहण 08:38 से 11:21 तक दृश्य होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह ग्रहण धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के दौरान, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होगा।

यहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?
5 जुलाई 2020 को लगने वाला ये चंद्र ग्रहण अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप में दिखाई देगा। ये ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। जानकारों का कहना है ग्रहण के समय में व्यक्ति को भगवान वासुदेव या श्रीकृष्ण मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिन आप ओम नमो भगवते वासुदेवाय या श्रीकृष्णाय श्रीवासुदेवाय हरये परमात्मने, प्रणत:क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

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इस माह दो ग्रहों में परिवर्तन...
इस जुलाई के महीने में खास बात ये भी है कि इस माह केवल दो ग्रहों में ही परिवर्तन हो रहा है। जिनमें से सूर्य 17 जुलाई को कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे। वहीं 5 जुलाई को चंद्रग्रहण भी रहेगा, ग्रहण के समय चंद्रमा धनु राशि में रहेगा। इसके बाद 6 जुलाई को चंद्रमा का मकर राशि में प्रवेश है, जो कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। जबकि 12 जुलाई को बुध केवल मिथुन राशि में मार्गी होंगे।

ये जरुरी नहीं है कि ग्रहण व ग्रहों का परिवर्तन ठीक उसी दिन अपना प्रभाव दिखाए, ऐसे में हर ग्रह के परिवर्तन व ग्रहण का प्रभाव के लिए कुछ समय सीमा होती है। ऐसे में इन परिवर्तन के कुछ दिनों के बाद तक इसके प्रभाव सामने आते हैं।

1. चंद्र ग्रहण का प्रभाव

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार 21 जून को लगे सूर्य ग्रहण का प्रभाव 21 दिनों तक रहेगा और साथ में 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण लगने की वजह से स्थितियां बिगड़ सकती हैं। दरअसल ज्योतिष के अनुसार चंद्रग्रहण की स्थिति में चंद्र के साथ केतु का व सूर्यग्रहण में सूर्य के साथ राहु का खास प्रभाव रहता है। वहीं 6 जुलाई को चंद्र का शनि की मकर राशि में प्रवेश विषयोग का निर्माण...

: वर्तमान में चल रहे तनाव के बीच वहीं यदि एशिया के परिद्रश्य पर नजर डालें तो चीन की कुंडली में चंद्र लग्न का होते हुए विष योग की स्थिति बना रहा है ऐसे में इसके द्वारा चीन को काफी हद तक प्रभावित करने की संभावना है। जबकि केतु का चीन की कुंडली के भाग्य भाव में होना भी चीन के नुकसान को दर्शा रहा है।

जबकि चंद्रग्रहण के चलते चीन एक बार फिर भारत के विरुद्ध कपटपूर्ण कार्य कर सकता है। इसका कारण यह है कि चंद्रग्रहण के चलते चंद्र प्रभावित हो रहे हैं। वहीं चीन की कुंडली में चतुर्थ भाव का स्वामी मंगल नीच का होकर युद्ध स्थान यानि सप्तम भाव में चंद्रमा को पीड़ित कर संपूर्ण रूप से कपट योग का निर्माण कर रहा है। इस योग के साथ रहस्य स्थान यानी अष्टम भाव में पड़ा शनि चीन को धोखे और छल-कपट में निपुण बनाता है। चीन के इस दौरान खर्चे बढ़ेगे, लेकिन आय में कमी आएगी।

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: वहीं भारत की कुंडली में चंद्र का अपनी ही कर्क राशि में होना समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसके अलावा केतु का सप्तम भाव में होना किसी अज्ञात शत्रु के सामने आने का संकेत देता है। वहीं ये नेपाल को लेकर भी तनाव की ओर संकेत करता दिख रहा है।

: जबकि पाकिस्तान की कुंडली में चंद्र मिथुन राशि में होते हुए पराक्रम भाव में है, ऐसे में चंद्रग्रहण पाकिस्तान के लिए भारी आफत ला सकता है। वहीं केतु के कारण यह स्थिति और ज्यादा गंभीर होती दिख रही है।

पंडित शर्मा के अनुसार कुल मिलाकर यदि भारत चीन युद्ध नहीं भी हुआ तो भी तनाव चरम पर पहुंचने की संभावना है, लेकिन इसका खामियाजा बहुत हद तक पाकिस्तान को चुकाना होगा। वैसे जुलाई अंत तक स्थितियां काफी भयावह होती दिख रही हैं। कुल मिलाकर पाकिस्तान की सेहत पर इसका अत्यंत गंभीर असर पड़ता दिख रहा है।

2. सूर्य का 17 जुलाई को कर्क राशि में परिवर्तन, जानें प्रभाव...

चीन की कुंडली में सूर्य भाग्य भाव में है वहीं राशि परिवर्तन के चलते ये सप्तम भाव मे आ जाएगा, जबकि लग्न शनि की मकर राशि का होने के चलते ये तनाव पैदा करेगा, साथ ही चीन की आय को भी अत्यधिक प्रभावित करता हुआ दिख रहा है।

वहीं भारत के मामले में सूर्य कर्क राशि परिवर्तन के साथ ही जन्मकुंडली के अनुसार पराक्रम भाव पर आ जाएगा, जिससे भारत के द्वारा युद्ध की स्थिति में जीत की संभावना प्रबलतम हो जाएगी।

जबकि पाकिस्तान की कुंडली में भी सूर्य जन्मकुंडली के अनुसार चतुर्थ भाव आने से एक बार फिर भारत पाकिस्तान में तनातनी के बीच, पाकिस्तान के भारत के समक्ष पूरी तरह से सेरंडर करने की ओर इशारा करता दिख रहा है।

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3. बुध 12 जुलाई को हो जाएंगे मिथुन राशि में मार्गी...

चीन की जन्मकुंडली के हिसाब से मिथुन राशि शत्रु भाव में है, ऐसे में बुध का वहां मार्गी होना चीन के समर्पण को दर्शाता दिख रहा है। यानि चीन युद्ध से बचने के तरीकों पर काम करेगा, लेकिन चंद्र की गति के चलते कुछ कपटपूर्ण कार्य भी करता रहेगा।

वहीं भारत की जन्मकुंडली के हिसाब से बुध का मिथुन राशि में मार्गी होना तनाव के बीच आय के स्त्रोतों को बढ़ाता हुआ दिख रहा है। इस समय कई कंपनियां भारत की ओर रुख कर सकती हैं, वहीं इस दौरान भारत की संपत्ति में वृद्धि की संभावना हैं।

इसके अलावा यदि पाकिस्तान की बात करें तो बुध का मार्गी होना पाकिस्तान की कुंडली में पराक्रम भाव में रहेगा। चूकिं बुध को नपुंसक ग्रह भी माना जाता है, ऐसे में पाकिस्तान के पराक्रम में भी नपुंस्कता बढ़ने की संभावना के बीच पाकिस्तान का भारत के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए,किसी भी तरह की गलतियों का दोहराव न करने का वादा करने की संभावना है।

4. चंद्र का शनि की मकर राशि में 6 जुलाई के प्रवेश का असर...

6 जुलाई 2020 को चंद्र के मकर में प्रवेश के चलते जहां चीन के लग्न में विषयोग का असर देखने को मिलेगा। ऐसे में चीन ऐसी परिस्थितियों में फंसता दिख रहा है, जिसके कारण उसे बैकफुट पर आने को मजबूर होना पड़ेगा। वहीं इसके लग्न के ठीक सामने 17 जुलाई से सूर्य के आने से चीन की अंदुरुनी स्थिति काफी खस्ताहाल होने की संभावना है।

वहीं यदि भारत की बात करें तो इस समय चंद्र भारत के भाग्य भाव में रहेगा। ऐसे में ये भारत के कई निर्णयों को प्रभावित करेगा, लेकिन शुक्रवार के दिन हो रहे इस परिवर्तन के चलते जहां कुछ परेशानियों को भारत के सामने खड़ा कर सकता है, वहीं कुछ लाभ भी प्रदान करेगा।

जबकि पाकिस्तान के मामले में चंद्र कर्म भाव में आ जाने से उसके कर्मों की सजा दिलाता दिख रहा है। इस दौरान पाकिस्तान पर शनि का दंड चलने की प्रबल संभावना है।



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