जुलाई 2020 : इस माह कौन-कौन से हैं तीज त्यौहार, जानें दिन व शुभ समय

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कोरोना संक्रमण के चलते करीब 70 दिनों से तीज त्यौहार को लोग धूमधाम से नहीं मना पाए। ऐसे में मई 2020 के अंत में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ( Lockdown ) के चौथे चरण की समाप्ति से ठीक पहले यानि लॉकडाउन ( Lockdown ) 4.0 समाप्त होने से एक दिन पहले, केंद्र सरकार ने 1 जून से राज्यों के लिए नए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए थे। अनलॉक ( Unlock 1.0 )(लॉकडाउन से बाहर निकलने के लिए कदम) के तहत लॉकडाउन में जिन गतिविधियों में प्रतिबंध लगाया गया था, उन्हें अलग-अलग चरणों के हिसाब से दोबारा खोला जा रहा है।

ऐसे में जहां करीब 70 दिनों के बाद 1 माह के अनलॉक के दौरान आप और हम कुछ नियमों का पालन करते हुए कई बार घरों से बाहर आ चुके हैं, वहीं अब अनलॉक 1 के बाद जुलाई 2020 में आने वाले त्योहारों को हर कोई धूमधाम से मनाना चाहेगा। वहीं सरकार ने 29 जून 2020 को अनलॉक 2 के लिए गाइड लाइन जारी की है।

ऐसे में आज हम आपको जुलाई 2020 में आने वाले प्रमुख तीज त्योहारों सहित इस समय पड़ने वाले शुभ मुहूर्तों के बारे में बता रहे हैं। ताकि आप इनकी तैयारी कर सकें।

hindu calendar JULY 2020 for hindu festivals

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार 01 जुलाई 2020 को देवशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी है। वहीं इस महीने में गुरु-पूर्णिमा भी मनाई जाएगी। इनके साथ ही कर्क संक्रांति, हरियाली तीज व नाग पंचमी भी जुलाई 2020 में ही हैं।

इन सब के अलावा श्रावण पुत्रदा एकादशी भी इसी माह होगी। जबकि इसी जुलाई में श्रावण माह की शुरुआत भी होगी और इसी माह यानि जुलाई 2020 सावन के 4 सोमवार भी पड़ेंगे।

जुलाई 2020 के त्यौहार....

: 01 जुलाई 2020,बुधवार - देवशयनी एकादशी , आषाढ़ी एकादशी...
( आषाढ़ी एकादशी या देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु का शयन प्रारंभ होने से पहले विधि-विधान से पूजन करने का बड़ा महत्व है। पुराणों के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए क्षीरसागर में शयन करते हैं। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी का व्रत करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके सभी पापों का नाश होता है। इस दिन मंदिरों और मठों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है,इस दिन को हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। )

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02 जुलाई 2020,गुरुवार - प्रदोष व्रत (शुक्ल)...
( हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। शास्त्रों में प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का दिन है,किसी भी प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम के समय सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है। जो प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है उसे गुरु प्रदोष कहते हैं।

मान्यता के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत करके कोई भी व्यक्ति अपने मन की इच्छा को बहुत जल्द पूरा कर सकता है। गुरु प्रदोष का व्रत करके दाम्पत्य जीवन में आ रही सारी समस्याओं को खत्म करने के साथ साथ तलाक तक के दुर्योग को नष्ट किया जा सकता है।)

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05 रविवार - गुरु-पूर्णिमा , आषाढ़ पूर्णिमा व्रत
(आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था, अतः इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी होता है, अतः इस दिन वायु की परीक्षा करके आने वाली फसलों का अनुमान भी किया जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु की विशेष पूजा करता है और उसे यथाशक्ति दक्षिणा,पुष्प,वस्त्र आदि भेंट करता है।)

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06 सोमवार - श्रावण माह शुरु
( सावन सोमवार : 06 जुलाई 2020 पहला सावन सोमवार व्रत,13 जुलाई 2020 दूसरा सावन सोमवार व्रत, 20 जुलाई 2020 तीसरा सावन सोमवार व्रत,27 जुलाई 2020 चौथा सावन सोमवार व्रत )

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08 बुधवार - संकष्टी चतुर्थी
(संकष्टी चतुर्थी व्रत में भगवान गणेश की पूजा होती है। मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस व्रत को फलदायी माना गया है। पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को ये व्रत रखा जाता है। इस व्रत में चांद के दर्शन जरूरी हैं। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। )

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16 गुरुवार - कामिका एकादशी , कर्क संक्रांति
(कामिका एकादशी को पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के उपेन्द्र स्वरुप की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस एकादशी के व्रत को करने से पूर्वजन्म की बाधाएं दूर होती हैं। इस पवित्र एकादशी के फल लोक और परलोक दोनों में उत्तम कहे गये हैं। क्योंकि इस व्रत को करने से हजार गौ दान के समान पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

वहीं सूर्य के कर्क में प्रवेश करने के कारण ही इसे कर्क संक्रांति कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव कर्क राशि में आ जाते हैं। सृष्टि का भार भोलेनाथ संभालेंगे इसीलिए श्रावण मास में शिव पूजन का महत्व बढ़ जाता है। कर्क संक्रांति से भगवान विष्णु के पूजन का भी खास महत्व माना जाता है। वहीं इसी दिन से शक संवत यानि सूर्य के आधार पर बने कलैंडर के हिसाब से श्रावण मास का प्रारंभ होता है। )

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18 शनिवार - मासिक शिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)
( शिवरात्रि शिव और शक्ति के संगम का एक पर्व है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। शास्त्रों में शिवरात्रि पूजन का महत्‍व बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करके देवी-देवताओं ने मनचाहा वरदान पाया है। भगवान शिव के पूजन के लिए उचित समय प्रदोष काल माना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, इस दिन व्रत करके भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।)

20 सोमवार - श्रावण अमावस्या
(हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास में आने वाली अमावस्या को श्रावणी अमावस्या कहा जाता है, चूंकि इस मास से सावन महीने की शुरुआत होती है इसलिए इसे हरियाली अमावस्या भी कहते हैं। प्रत्येक अमावस्या की तरह श्रावणी अमावस्या पर भी पितरों की शांति के लिए पिंडदान और दान-धर्म करने का महत्व है।)

23 गुरुवार - हरियाली तीज
( हरियाली तीज या श्रावणी तीज का उत्सव श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह प्रमुख रुप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे कजली तीज के रूप में मनाते हैं। यह महिलाओं का उत्सव है। पेड़ों की डाल में झूले पड़ जाते हैं।

सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण है। आस्था, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस समय चारों तरफ हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं।)

25 शनिवार - नाग पंचमी
( हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। नाग जहां भगवान शिव के गले के हार हैं। वहीं भगवान विष्णु की शैय्या भी। लोकजीवन में भी लोगों का नागों से गहरा नाता है, वहीं नाग योनी मनुष्य योनी से उपर मानी गई है।

इन्हीं कारणों से नाग की देवता के रूप में पूजा की जाती है। सावन मास के आराध्य देव भगवान शिव माने जाते हैं। साथ ही यह समय वर्षा ऋतु का भी होता है, जिसमें माना जाता है कि भू-गर्भ से नाग निकल कर भू तल पर आ जाते हैं। वह किसी अहित का कारण न बनें, इसके लिए भी नाग देवता को प्रसन्न करने के लिये नाग पंचमी की पूजा की जाती है।)

30 गुरुवार - श्रावण पुत्रदा एकादशी
( श्रावण मास की शुक्ल एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। श्रावण पुत्रदा एकादशी (Shravana Putrada Ekadashi) का विशेष महत्‍व है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से वाजपेयी यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है।

पुत्रदा एकादशी साल में दो बार आती है एक है श्रावण एकादशी और दूसरी है पौष एकादशी। सावन महीने में आने वाली पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति तथा संतान की समस्याओं के निवारण के लिए किया जाता है। सावन की पुत्रदा एकादशी को विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान संबंधी हर चिंता और समस्या का अंत हो जाता है। )

जुलाई 2020 में सर्वार्थसिद्धि योग...

दिनांक - दिन - समय (घं. मि. बजे से) - समय (घं. मि. बजे तक)
01 जुलाई 2020 - बुधवार - 26:34 - 29:16
02 जुलाई 2020 - गुरुवार - 5 :16 - 25:14
05 जुलाई 2020 - रविवार - 23 :02 - 29:17
06 जुलाई 2020 - सोमवार - 13:12 - 29:18
12 जुलाई 2020 - रविवार - 5:20 - 8:18 `
14 जुलाई 2020 - मंगलवार - 5:12 - 14:07
15 जुलाई 2020 - बुधवार - 16:43 - 29:22
20 जुलाई 2020 - सोमवार - 21:21 - 29:24
26 जुलाई 2020 - रविवार - 5:26 - 12:37
29 जुलाई 2020 - बुधवार - 8:33 - 29:28
30 जुलाई 2020 - गुरुवार - 5:28 - 7:42

जुलाई 2020 में अमृतसिद्धि योग...

01 जुलाई 2020 - बुधवार - 26 :34 - 29:16
14 जुलाई 2020 - मंगलवार - 5:21 - 14:07
26 जुलाई 2020 - रविवार - 5:26 - 12:37
29 जुलाई 2020 - बुधवार - 8:33 - 29:28


जुलाई 2020 में पुष्यामृत योग...

20 जुलाई 2020 - सोमवार - 21:21 - 29:24
21 जुलाई 2020 - मंगलवार - 5:24 - 20:30



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