Indian Railway और Telecom Ministry करेगी Chinese Companies की विदाई, दोबारा जारी किए जाएंगे टेंडर

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नई दिल्ली। चीन को सबक सिखाने के लिए सरकार ने बॉर्डर के साथ कारोबारी स्तर पर भी मोर्चा संभाल लिया है। इसके लिए पहले टेलीकॉम मिनिस्ट्री ( Telecom Ministry ) और रेलवे ( Indian Railway ) की ओर से कदम बढ़ाया गया है। दोनों मंत्रालयों की ओर से साफ कर दिया गया है कि उनके किसी प्रोजेक्ट्स में चीनी उपकरणों ( Chinese Equipments ) का इस्तेमाल ना किया जाए। साथ ही जिन चीनी कंपनियों ( Chinese Companies ) को कांट्रैक्ट मिले हुए हैं, उन्हें खत्म कर दोबारा से बिड कर दूसरी कंपनियों को थमाया जाए। आपकों बता दें कि बीएसएनएल के 4 जी नेटवर्क को रिवाइवल करने के लिए चीनी उपकरणों का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं दूसरी ओर इंडियन रेलवे के पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ( Eastern Dedicated Freight Corridor ) में भी चीनी कंपनियों को टेंडर मिले हुए हैं।

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डॉट ने बीएसएलएल को जारी किए दिशा निर्देश
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम की ओर से भारत संचार निगम लिमिटेड को बीएसएनएल 4 जी अपग्रेडेशन प्रोग्राम में चीनी इक्विपमेंट्स के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर दिया है। वहीं इस प्रोग्राम के पूरे टेंडर को नए सिरे से जारी करने के आदेश भी दे दिए गए हैं। वास्तव में बीएसएनएल रिवाइल करने के लिए ही 4 जी का अपग्रेडेशन किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर टेलीकॉम डिपार्टमेंट प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों को भी चीनी उपकरणों पर से निभ्र्भरता कम करने को कह सकती है। सूत्रों की मानें तो सरकारी अफसरों ने कहा कि चीनी कंपनियों द्वारा बने उपकरण के नेटवर्क सेक्योरिटी पर हमेशा से सवालिया निशान रहा है। अगर बात चाइनीज टेक कंपनी हुवावे पर भी कई देशों ने सवाल उठाए हैं और जांच के घेरे में भी है।

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इंडियन रेलवे की ओर से उठाया गया बड़ा कदम
वहीं दूसरी ओर इंडियन रेलवे की ओर से भी बड़ा कदम उठा लिया गया है। रेलवे ने पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर मे चीनी रेलवे सिग्नल एंड कम्युनिकेशन कॉर्प के टेंडर को खत्म करने की मं्रजूरी दी जा रही है। सीआरएससी को 2016 में 400 किलोमीटर से अधिक रेलवे लाइन में सिग्नलिंग सिस्टम लगाने का टेंडर मिला था। जानकारी के अनुसार इस प्रोजेक्ट में चीन की एकमात्र उपस्थिति है जिसमें रेलवे अब भारतीयों को शामिल करना चाहता है। लगभग 500 करोड़ रुपए के ठेके में उत्तर प्रदेश में नया भाऊपुर-मुगलसराय खंड में 413 किलोमीटर की दो लाइनों के लिए डिजाइनिंग, आपूर्ति, निर्माण, परीक्षण और कमीशनिंग सिग्नलिंग, दूरसंचार और संबद्ध कार्य शामिल हैं।



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