Coronavirus : बाईचुंग भूटिया ने लॉकडाउन में संघर्ष कर रहे मजदूरों के लिए खोला अपनी बिल्डिंग का दरवाजा

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नई दिल्ली : भारतीय फुटबॉल टीम (Indian football Team) के पूर्व कप्तान और भारत के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकरों में शुमार बाइचुंग भूटिया (Baichung Bhutia) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) कारण देश में लगे लॉकडाउन के दौरान संघर्ष कर रहे प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए आगे आए हैं। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान संघर्ष कर रहे मजदूरों को सिक्किम स्थित लुम्सेय, तडोंग में रहने के लिए अपनी बिल्डिंग देने की पेशकश की है। ये प्रवासी मजदूर 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान अपने-अपने घर जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहीं भूटिया भी इस समय पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में फंसे हुए हैं।

100 लोग रह सकते हैं इस बिल्डिंग में

भूटिया ने कहा कि सिक्किम में कई सारे प्रवासी श्रमिक हैं, जो फंस गए हैं। राज्य में कोरोना वायरस का अब तक कोई मामला मामले सामने नहीं आया है। इसलिए उन्होंने अपनी बिल्डिंग श्रमिकों को देने का फैसला किया है। भूटिया ने कहा कि उन्हें कोलकाता से लौटना था, लेकिन लॉकडाउन के कारण वह सिलीगुड़ी में फंसे हैं। इसलिए यहीं से वह सबकुछ संभाल रहे हैं। उनकी बिल्डिंग में करीब 100 लोग रह सकते हैं। यह पांच मंजिला है। इसमें पहले से ही 10 श्रमिक रह रहे हैं और हम उन्हें भोजन मुहैया करा रहे है। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में उन्होंने स्थानीय सरकार से भी मदद मांगी है।

उनका क्लब भी कर रहा है मजदूरों की मदद

पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि वह और उनका फुटबॉल क्लब यूनाइटेड सिक्किम भी बंगाल में श्रमिकों की मदद कर रहा है। उन्हें राशन-पानी मुहैया करा रहा है। 43 साल के भूटिया ने कहा कि वह स्थानीय प्रशासन से बात कर रहे हैं। देखते हैं कि बंगाल में भी श्रमिकों के लिए क्या किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने भी इस दिशा में काम कर रहा है। सरकार ने प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही को रोकने के लिए सभी जिला प्रशासनों को आदेश दिया है कि वे अस्थायी शेल्टर्स का प्रबंध करें और उनके लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करें।

भारतीय फुटबॉल टीम भी आई आगे

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में सिर्फ भूटिया ही आगे नहीं आए हैं। वर्तमान भारतीय फुटबॉल टीम के खिलाड़ी भी अपने-अपने यहां जरूरतमंदों को मदद मुहैया कराने में जुटे हैं। इन खिलाड़ियों ने अपने इलाकों में वित्तीय मदद के अलावा शिविर लगाने और खाना जुटाने में अहम भूमिका निभाई है। महामारी से बचने के लिए जागरूकता फैला रहे हैं। भारतीय कप्तान सुनील छेत्री विश्व संस्था फीफा और एशियाई फुटबॉल परिसंघ के कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए बने 'ब्रेक द चेन जागरूकता अभियान से जुड़े हैं। वहीं डिफेंडर प्रीतम कोटाल, मिडफील्डर प्रणय हलदर और डिफेंडर प्रबीर दास ने पश्चिम बंगाल में जरूरतमंदों की मदद के लिए करीब चार लाख रुपये इकट्ठे किए हैं।

पूर्व फुटबॉलर भी जुटे हैं मदद में

पूर्व फुटबॉलर्स ने 'प्लेयर्स फॉर ह्यूमैनिटी' नाम का ग्रुप बनाया है। इसमें मौजूदा और पूर्व खिलाड़ी शामिल हैं। यह सब जरूरतमंदों को खाना-पानी मुहैया करा रहे हैं। इनमें मेहताब हुसैन, सैयद रहीम नबी, डेनसन देवदास, संदीप नंदी और देबब्रत रॉय पूर्व खिलाड़ी मौजूद हैं तो वहीं मौजूदा खिलाड़ियों में से प्रीतम कोटाल, प्रणय हलदर, अरिंदम भट्टाचार्य, प्रबीर दास, सौविक चक्रवर्ती, देबजीत मजूमदार आदि फुटबॉलर मौजूद हैं। इन फुटबॉलरों ने पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री राहत कोष में भी कुछ राशि जमा कराई है।



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