क्यों होती है Vishwakarma Puja ? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और इसकी पूरी कहानी

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नई दिल्ली। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को विश्वकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja ) की जाती है। माना जाता है कि इस दिन ही ऋषि विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। इस साल विश्वकर्मा पूजा 16 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन विधिपूर्वक भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से रोजगार और बिजनेस में तरक्की मिलती है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पी कहा जाता है। वे निर्माण एवं सृजन के देवता हैं। इसके अलावा उन्हें संसार का पहला इंजीनियर और वास्तुकार भी कहा जाता है।

विश्वकर्मा पूजा का मुहूर्त

इस साल विश्वकर्मा पूजा 16 सितंबर को सुबह 06 बजकर 53 मिनट पर कन्या संक्रांति का क्षण है। ये समय विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त है। विश्वकर्मा पूजा के दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 01 बजकर 53 मिनट तक है। तो इस समय काल में पूजा न करें। ऐसे में पूजा का शुभ मुहूर्त- 16 सितंबर- सुबह 10 बजकर 9 मिनट से 11 बजकर 37 मिनट तक है।

क्यों की जाती है विश्वकर्मा पूजा?

पौराणिक कथा के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा ब्रह्मा जी ने जब संसार का निर्माण किया तो ये विशालकाय अंडे के आकार की थी। उस अंडे से ही सृष्टि की उत्पत्ति हुई। कहते हैं कि बाद में ब्रह्माजी ने इसे शेषनाग की जीभ पर रख दिया। लेकिन शेषनाग के हिलने से इसे भारी नुकसान होता था। इसके बाद विश्वकर्मा ने मेरू पर्वत को जल में रखवा कर संसार को को स्थिर कर दिया। तभी से भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार मनाते हैं। और इनकी पूजा किया जाने लगा। भगवान विश्वकर्मा की छोटी से छोटी दुकानों में भी पूजा की जाती है।



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