Health Insurance Policy में Cashless या REIMBURSMENT कौन सा ऑप्शन चुना आपने, जानें इनके फायदे-नुकसान

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नई दिल्ली: कोरोनावायरस की वजह से हेल्थ इंश्योरेंस ( health insurance ) आज की तारीख में सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। फिलहाल लोग बढ़ चढ़कर हेल्थ इंश्योरेंस की खरीदारी कर रहे हैं लेकिन फिर भी अभी भी लोग कंफ्यूज होते हैं कि वो REIMBURSMENT का ऑप्शन चूज करें या CASHLESS का। दरअसल हर कंपनी अपने कस्टमर्स की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी डिजाइन करती है। आपको अपने हिसाब से पॉलिसी चूज करनी होती है क्योंकि मार्केट में सस्ती से लेकर महंगी तक हेल्थ पॉलिसी मौजूद हैं ।

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कैशलेस हेल्थ पॉलिसी ( health insurance cashless claims ) की बात करें तो इस तरह की पॉलिसीज में हास्पिटल में होने वाले हर तरह के खर्च को इंश्योरेंस कंपनियां ( insurance companies ) उठाती हैं। यानि आपके हॉस्पिटल में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक दवाई, टेस्ट, हॉस्पिटल और बाकी सारे खर्चे इंश्योरेंस कंपनी उठाएगी। हां यहां एक बात ध्यान रखने वाली है कि अपने भर्ती होने की खबर आपको कंपनी को 48 घंटे पहले देनी होती है। यानि कि इसमें प्लान्ड हॉस्पिटलाइजेशन कवर किया जाता है। लेकिन इमरजेंसी सिचुएशन में 24 घंटे की अवधि भी मान्य होती है। इस तरह की पॉलिसी लेते वक्त आप ध्यान दें कि आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ( health insurance policy ) में ज्यादा से ज्यादा हॉस्पिटल हों ताकि आपको इलाज करवाने में आसानी हों।

दूसरी तरह की पॉलिसीज होती है Reimbursement Policy, इन पॉलिसीज में आपको पूरा हॉस्पिटल खर्च अपने आप उठाना होता है और बाद में आप कंपनी को बिल सब्मिट करते हैं। जिसे बाद में कंपनी आपको वापस करती है। यानि REIMBURSMENT करती है उन सभी बिल्स को। यानि इस पॉलिसी में इमरजेंसी में अगर आपको किसी को एडमिट कराना हो तो सारा पैसा खुद ही मैनेज करना होता है अगर आपके पास पैसा न हो तो आपको कई बार लोन भी लेना पड़ता है। क्योंकि इंश्योरेंस कंपनी आपको बाद में पैसा देती है। कई बार बिल का क्लेम क्लियर ( health policy claim process ) करने में भी कंपनी बहुत टाइम ले लेती है। इससे भी पॉलिसी होल्डर ( health policy holder ) को काफी दिक्कत होती है।



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