'गुलाबो सिताबो' की फातिमा बेगम सुर्खियों में, छोटे किरदार में डाल दी जान

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-दिनेश ठाकुर
शूजित सरकार की 'गुलाबो सिताबो' ( Gulabo Sitabo ) के लिए सबसे ज्यादा तारीफ इसके बुजुर्ग मिर्जा अमिताभ बच्चन ( Amitabh Bachchan ) बटोर रहे हैं। बांके आयुष्मान खुराना ( Ayushmaan Khurrana ) की भी चर्चा हो रही है। यह दोनों फिल्म के अहम किरदार हैं, इसलिए इनकी चर्चा लाजिमी है, लेकिन अगर छोटे-से किरदार में वयोवृद्ध अदाकारा फारुख जफर ( Farrukh Jaffar ) की भी चर्चा हो रही है तो इसका श्रेय उनकी सहज और जिंदादिली से भरपूर अदाकारी को जाता है।

मुजफ्फर अली की 'उमराव जान' (1981) उनकी पहली फिल्म है। इसमें उन्होंने रेखा की मां का किरदार अदा किया था। उन्होंने 'हुस्ने-जाना', 'आधा गांव' और 'नीम का पेड़' जैसे टीवी धारावाहिकों में भी अदाकारी के जौहर दिखाए। शाहरुख खान की 'स्वदेश' में वे फातिमा बी के किरदार में थीं, जो एक सीन में कहती है- 'बर्फ का मुकद्दर होता है अपने ही पानी में पिघलते जाना।' उम्र पिघलती रही और वे आमिर खान की 'पीपली लाइव', 'सीक्रेट सुपर स्टार', सलमान खान की 'सुलतान' के अलावा दूसरे कलाकारों की 'चक्रव्यूह', 'तनु वेड्स मनु', 'फोटोग्राफ', 'अनवर का अजब किस्सा' आदि फिल्मों में अदाकारी के रंग घोलती रहीं। किसी भी कलाकार के लिए यह बड़ी उपलब्धि है कि उसकी कोई फिल्म देखकर लोग उसकी अगली फिल्म का इंतजार करें। 'गुलाबो सिताबो' से फारुक जफर ने यह उपलब्धि हासिल कर ली है।



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