मौसमी रोग के लिए कारगर है यूनानी चिकित्सा

Spread the love

दूषित पानी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण इस मौसम में हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है जिससे हमें वायरल फीवर, डायरिया, दस्त, पेट संबंधी रोग, मलेरिया, डेंगू, तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी और टायफॉइड जैसी बीमारियां होने लगती हैं। यूनानी चिकित्सा पद्धति में इनसे बचाव के लिए ये उपाय किए जाते हैं।


उपचार: इम्युनिटी बढ़ाने के लिए खमीरा (मर्बारीद) का प्रयोग किया जाता है। यह एक मोती होता है जिस पर चांदी का वर्क चढ़ा होता है। उसे चाटने से कमजोरी दूर होती है। बच्चों को 2-3 ग्राम व वयस्कों को 5 ग्राम तक सुबह व शाम इसे लेना होता है। खाली पेट या सोते वक्त दूध में मुनक्के उबालकर लेने से शरीर में ताकत आती है और मौसमी बीमारियों का खतरा कम होता है। बच्चे 2-3 व बड़े 4-5 मुनक्के लें। माजून जो कि गुलाब की पत्तियों से बनाई जाती है, यह चटनी के रूप में होती है। इसे पाचन व नसों की गड़बड़ी को दूर करने के लिए दिया जाता है। अर्क पुदीना और सौंफ अर्क बाद्यान पानी की कमी को दूर कर पाचन को दुरुस्त रखता है। जिगरीन सिरप का प्रयोग टायफॉइड में लिवर को ठीक रखने के लिए किया जाता है।



Read More
Source Link

Related Stories